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State Annual Budget 2016-17 Speech (Main Points on Water resources and irrigation)


State Annual Budget 2016-17 Speech (Main Points on Water resources and irrigation)

राज्य बजट 2016—17 का भाषण के मुख्य बिन्दु (जल संसाधन एवं सिंचित क्षेत्र)

जल संसाधन एवं सिंचित क्षेत्र:

  • गंग केनाल के आधुनिकीकरण का कार्य वर्ष 2016-17 में पूर्ण कर लिया जायेगा। बारां जिले में  प्रगतिरत लासी परियोजना का कार्य जून 2016 में पूर्ण कर आगामी वर्ष में जल भराव किया जायेगा। साथ ही पिड़ावा तहसील झालावाड़ में निर्माणाधीन गागरीन सिंचाई परियोजना के बाँध का कार्य पूर्ण कर इसमें भी जल भराव जून 2016 से प्रारंभ कर दिया जायेगा। आकोदरा-देवास द्वितीय का कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है। गंग नहर, सिद्धमुख-नोहर, अमरसिंह sub-branch, भाखड़ा नहर, चंबल तथा बीसलपुर परियोजनाओं में लगभग 73 हजार हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्र में खाळों का निर्माण किया गया है। इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में निर्माण, मरम्मत, रख-रखाव एवं संचालन आदि कार्य हेतु 377 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है तथा इस परियोजना में 6 हजार से भी अधिक हेक्टेयर का नया सिंचित क्षेत्रा खोला गया है। सिंचाई क्षेत्र के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए आगामी वर्ष में जल संसाधन, इंदिरागांधी नहर एवं ब्।क् विभाग के लिए वर्ष 2016-17 में 4 हजार 47 करोड़ 44 लाख का प्रावधान किया जा रहा है। जो वर्ष 2015-16 के संशोधित अनुमान से 27.81 प्रतिशत अधिक है। साथ ही, आगामी वर्षों में निम्न महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रारंभ की जाएंगी-
  • राज्य में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के rehabilitation के कार्यों, water user associations की क्षमतावर्धन एवं सिंचित कृषि विविधता हेतु आगामी 8 वर्षों के लिए Rajasthan Water Sector Livelihood Improvement Project चलाया जायेगा। इस योजना के तहत 24 जिलों की 63 मध्यम एवं 370 लघु परियोजनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जायेगा तथा 4 लाख 66 हजार हेक्टेयर से भी अधिक सिंचित क्षेत्रा को इससे लाभान्वित किया जायेगा। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 3 हजार 461 करोड़ रुपये का व्यय होगा।
  • रबि, ब्यास, सतलज एवं घग्घर नदियों के बाढ़ के रूप में बहने वाले अतिरिक्त पानी के उपयोग के लिए इंदिरा गाँधी नहर प्रणाली का re-structuring कर Rajasthan Water Sector Re-structuring Project for Desert Area चलाया जायेगा। परियोजना अन्तर्गत मुख्य रूप से इंदिरा गाँधी नहर फीडर का हरियाणा व राजस्थान में एवं इंदिरा गाँधी मुख्य नहर एवं शाखाओं की re-lining प्रस्तावित है। तीन हजार 264 करोड़ रुपये की इस परियोजना से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर एवं बाड़मेर जिले लाभान्वित होंगे तथा 1 लाख 81 हजार 618 हेक्टेयर CCA के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
  • बारां, झालावाड़ एवं कोटा जिले के किसानों का वर्षों पुराना परवन सिंचाई योजना का सपना अब सच होगा। इस योजना से झालावाड़, बारां एवं कोटा जिले के कुल 313 गाँवों की 1 लाख 31 हजार हेक्टेयर भूमि लाभान्वित होगी तथा इन जिलों के 820 गाँव पेयजल से लाभान्वित होंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 4 हजार 824 करोड़ रुपये है। इस योजना की क्रियान्विति हेतु बहुराष्ट्रीय या बाह्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से वित्त पोषण की व्यवस्था की जायेगी। परियोजना के डूब क्षेत्रा से प्रभावित भूमि की अवाप्ति की प्रक्रिया प्रगतिरत है। आगामी वर्ष में इस हेतु 700 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • आगामी वर्ष में चंबल सिंचित क्षेत्र कोटा के तहत सुल्तानपुर sub-branch system, अयाना ब्रांच नहर सिस्टम, लक्ष्मीपुरा, खातोली, चरी, ईश्वरनगर, अरनेठा, चितावा, कुलिंदा, बाल्कासा distributary एवं कापरेन नहर शाखा के revamping के कार्य 213 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से करवाये जायेंगे।
  • माही बाँध के बेक वाटर क्षेत्र से बांसवाडा तहसील के लोगो को 850 हैक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु  Drip एवं फव्वारा पद्धति से अम्बापुरा लिफ्ट सिंचाई परियोजना प्रथम का कार्य आगामी 3 वर्षो में 60 करोड़ रुपये की लागत से करवाया जायेगा।
  • भरतपुर जिले की डीग तहसील में डीग escape channel की चैन 72 से डीग कस्बे तक जीर्णोद्धार एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य करवाये जायेंगे।
  • झालावाड़, दौसा, टोंक, सवाईमाधोपुर, जयपुर, करौली, डूंगरपुर, राजसमन्द एवं चित्तौड़गढ़ जिले में 11 एनिकटों का निर्माण कार्य 25 करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से करवाया जायेगा।
  • झालावाड़ जिले की चवंली सिंचाई परियोजना की नहरों के जीर्णोद्धार का कार्य 9 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से कराया जायेगा।
  • पार्वती, कालीसिंध नदियों के अधिशेष जल का उपयोग कर बारां, कोटा, बूँदी, टोंक, सवाईमाधोपुर, दौसा करौली एंव धौलपुर को पेयजल एवं सिंचाई सुविधा का लाभ दिलाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाये जाने की घोषणा।
  • साबरमती बेसिन का अधिशेष जल जो कि राज्य के बाहर व्यर्थ बह जाता है, का उपयोग कर राज्य के पश्चिमी क्षेत्रा के जवाई बाँध में ले जाकर उस क्षेत्र की पेयजल समस्या के समाधान हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनायी जायेगी।
  • बांसवाड़ा जिले की तहसील कुशलगढ़, सज्जनगढ़, गांगड़ तलाई, बागीदोरा तथा बांसवाड़ा के 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में नयी सिंचाई क्षमता का सृजन कराये जाने हेतु माही के सेडल डैम से सिंचाई प्रणाली विकसित करने हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनवायी जायेगी। 12 हजार करोड़ रुपयों से भी अधिक की लागत की इन परियोजनाओं से आगामी 7-8 सालों में राज्य में सिंचाई के परिदृश्य में अभूतपूर्व बदलाव आयेगा।
  • राज्य में उपलब्ध जल संसाधन, वर्षा जल व नदियों के जल के आकड़ों को राज्य स्तर पर एकत्रित करने एवं राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर आकड़ों का आदान प्रदान करने व सभी नागरिकों को internet के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में hydrological सूचना तंत्र विकसित किया जायेगा। इस परियोजना की लागत 128 करोड़ आयेगी तथा इसे आगामी 8 वर्षों में पूर्ण किया जायेगा।

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